किसीने पुछा तो होता... 😩
कपडे पहने तो एहसास हुआ,
की मैं अब तक नंगा था
नाम मिला तो कहते हैं पहचान बन गयी,
मंदिर पहुंचा तो ज्ञात हुआ
की एक भगवान भी होता है,
पैसे मिले, तो अपनी गरीबी का एहसास हुआ
महल देखकर अपना घर छोटा लगने लगा,
सभ्य बनाकर इस ज़माने ने,
मुझे अपनी जगह दिखा दी.
नाम, शर्म, गरीबी, इबादत,
यह सारे चेहरों के हज़ारों लिबाज़ पहनाकर,
यह सारे मुखौटों के पहले - " मैं " कौन था?
यही भुला दिया.
किसीने पुछा तो होता,
भाई, लाइन मैं लगना चाहोगे क्या?
किसीने पुछा तो होता,
भाई, बस में चढ़ना चाहोगे क्या?
यूनिफार्म पहना दी,
हेयर कट करवा दिया,
‘Good Morning Teacher!’
केहलवा दिया,
किसीने पुछा तो होता,
भाई, ‘आदमी’ बनाना चाहोगे क्या?
सब कुछ लूट कर मुझसे,
50 साल बाद पूछते हैं,
खुद से मिलना चाहोगे क्या? 😩
संजय चंद्रशेखर नायर
23 मार्च 2025